shani dev story in hindi

Shani Dev Story In Hindi शनि देव की कहानी और प्रसन्न करने का मंत्र

इस लेख में जानिए शनिदेव के बारे में में हिंदी में – Shani Dev Story In Hindi.

शनि देव का नाम लेते ही हर मनुष्य के मन में एक अनजाना भय व्याप्त हो जाता है, आखिर क्यों हर व्यक्ति शनि देव से डरता है। आज हम जानेंगे की शनि देव सिर्फ शत्रु नहीं बल्कि मित्र भी होते हैं और अगर हम जीवन में हर काम सही तरीके से करें तो हमें शनिदेव से डरने की कोई ज़रूरत नहीं होगी।

शनि देव सबसे लोकप्रिय देवताओं में से एक हैं जो मनुष्यों से बुराई को दूर करने और बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। शनि का शाब्दिक अर्थ है “धीमी गति से चलने वाला”। आइये अब जानते हैं शनि देव की कहानी क्या है।

Shani Dev Story In Hindi शनि देव की कहानी

शनि देव का जन्म सूर्य देव और देवी छाया से हुआ था, शनिदेव को भगवान यम के बड़े भाई के रूप में जाना जाता है। साथ ही यमुना देवी और पुत्री भद्रा (ताप्ती) उनकी बहनें हैं और भगवान शिव उनके गुरु हैं। उनके दो अन्य भाई मनु और वैवस्तव मनु और दक्ष कन्या संध्या उनकी सौतेली माँ हैं।

जब भगवान छाया देवी के गर्भ में थे, तब छाया देवी भगवान शिव की तपस्या में इतनी तल्लीन थीं कि उन्हें अपने भोजन की भी परवाह नहीं थी। उसने अपनी तपस्या के दौरान इतनी तीव्रता से प्रार्थना की कि उनके गर्भ में बच्चे पर प्रार्थनाओं का गहरा प्रभाव पड़ा। चमचमाती धूप में बिना भोजन और छाँव के इतनी बड़ी तपस्या के परिणामस्वरूप शनि देव का रंग काला पड़ गया।

जन्म से ही, भगवान शनि को अपनी माता की तपस्या की महान शक्तियां विरासत में मिली थीं। उसने देखा कि उसके पिता उसकी माँ का अपमान कर रहे थे। उसने अपने पिता को क्रूर निगाह से देखा। परिणामस्वरूप उनके पिता का शरीर काला पड़ गया था। भगवान शिव ने सूर्य देव को सलाह दी और उन्हें बताया कि क्या हुआ था। इसके बाद भगवान सूर्य ने अपनी गलती स्वीकार की और माफी मांगी।

शनि देव भगवान शिव के परम भक्त हैं किन्तु उन्होंने भगवान शिव भी शनिदेव की नीच दृष्टी से बच नहीं सकें। ऐसी मान्यता है की शनि की दशा से कोई नहीं बच सकता चाहे तो देवता हों या मनुष्य। इसलिए हमें अच्छे कर्म करने चाहिए और शनिदेव के Shani Mantra का जाप करना चाहिए ताकि शनिदेव की कृपा प्राप्त हो।

भगवान शिव और शनिदेव के युद्ध की कहानी

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव का जन्म एकबार अपने अनन्य भक्त दधीचि मुनि के यहां पुत्र के रूप में हुआ। ब्रह्मा जी ने इनका नाम पिप्पलाद रखा। पिप्पलाद के जन्म लेते ही उनके पिता की मृत्यु हो गयी और मृत्यु का कारण मृत्यु का कारण शनिदेव की कुदृष्टि थी। जब पिप्पलाद बड़े हुए और उन्हें शनि देव की कुदृष्टि द्वारा उनके पिता की मृत्यु के बारे में ज्ञात हुआ तब वो बहुत क्रोधित हुए।

पिप्पलाद में शनिदेव के ऊपर ब्रह्रादंड नमक शस्त्र से प्रहार किया जिसका मुकाबला करना शनि देव के बस में नहीं था। शनि देव तीनों लोकों में भागने लगें किन्तु ब्रह्रादंड ने शनिदेव को घायल करके ही छोड़ा और उनके पैरों में जाकर लगा। कहते हैं की इससे शनि देव की गति धीमी हो गयी। तब शनिदेव ने भगवान शिव को स्मरण किया और शिवजी के बीच बचाव करने पर शनिदेव की जान बची।

क्या होता है जब शनि देव प्रसन्न हो जाते हैं?

शनिदेव सिर्फ कुपित ही नहीं होते बल्कि आपके अच्छे कर्मों के लिए आपको पुरस्कार भी देते हैं। अगर शनि की कृपा हो जाए तो रंक भी रातों रात राजा बन जाता है। धन का एकाएक आगमन होता है जिसे आम तौर पर हम कहते हैं छप्पर फाड़ के पैसे आना। इसलिए शनि देव से भयभीत ना हों और अच्छे कर्म करते रहे।

शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनिवार के दिन शनि मंदिर या हनुमान मंदिर में जाकर हनुमान जी और शनिदेव को तेल चढ़ाएं। हनुमान जी ने शनि देव को रावण की कैद से छुड़ाया था तब से शनि देव हनुमान जी के भक्तों पर विशेष कृपा बनाये रखते हैं। इसलिए शनि देव को प्रसन्न करने के लिए हनुमान जी की पूजा भी अति आवश्यक मानी जाती है।

शनि यंत्र Shani Yantra

आप ऊपर दिए गए शनि यन्त्र को फ्रेम में मढ़वा कर आपके घर में रख सकते हैं इससे भी आपको लाभ होगा और शनि देव की कृपा बनी रहेगी।

Shani In Astrology ज्योतिष विज्ञानं में शनि देव का महत्व

दुनिया पर शासन करने वाले नौ ग्रहों में से शनि सातवें स्थान पर है। इसे पारंपरिक ज्योतिष में अशुभ ग्रह के रूप में देखा जाता है। खगोल शास्त्र ’के अनुसार, पृथ्वी से शनि की दूरी 9 करोड़ मील है। इसका दायरा लगभग एक अरब 82 करोड़ और 60 लाख किलोमीटर है। और इसका गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी की तुलना में 95 गुना अधिक है। ग्रह शनि को सूर्य के चारों ओर एक चक्कर पूरा करने में 19 साल लगते हैं।

मनुष्य के विपरीत शनि देव की सही और गलत की बहुत अलग अवधारणा है। उसके लिए जो गलत है वह गलत है और जो सही है और शनि देव द्वारा किया गया हर फैसला तर्कसंगत होता है।

शनिदेव केवल उन लोगों को दंडित करते हैं जो बुरे कार्यों में शामिल हैं। एक न्यायाधीश की तरह वह अच्छे काम करने वालों को पुरस्कृत भी करते है और जीवन में प्रगति देते हैं । वह लोगों को अनुशासित होने के लिए मज़बूर करते है, और ये समझते हैं कि सफलता पाने के लिए व्यक्ति को विनम्र, केंद्रित, धैर्यवान और मेहनती होना चाहिए।

Shani Shingnapur Temple

शनि शिंगणापुर शनिदेव का प्रसिद्ध तीर्थस्थान है जो शिरडी साई मंदिर से करीब 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। शनि शिंगणापुर में शनिदेव स्वयं सभी ग्रामवासियों की रक्षा करते हैं इसलिए यहाँ किसी भी घर में दरवाजा नहीं है। यहाँ किसी भी घर में ताला लगाने की आवश्यकता नहीं है क्यूंकि यहाँ आज तक कभी कोई चोरी नहीं हुई है ना कमाल की बात ?

शनि देव को प्रसन्न करने के लिए शक्तिशाली मन्त्रों में से कुछ मंत्र हम नीचे दे रहे हैं जिसके जाप से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है।

Shani Dev Mantra In Hindi शनि मंत्र

ॐ शं शनिश्चराय नमः

ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः

ॐ मन्दाय नमः

ॐ सूर्यपुत्राय नमः

Conclusion

हमें उम्मीद है की आपको शनि देव की कहानी ( Shani Dev Story In Hindi ) पढ़कर अच्छा लगा होगा, अगर आपके विचार हमें कमेंट के माध्यम से बताना न भूलें। शनिदेव की कृपा आपके परिवार पर सदैव बनी रहे यही हमारी प्रार्थना है।

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