msp kya hai

MSP kya hai: What is MSP in Hindi ( MSP Full Form ) एमएसपी क्या है

नमस्कार दोस्तों ! आज हम जानेंगे की What is MSP in Hindi अर्थात MSP kya hai और इसके क्या लाभ हैं।

MSP kya hai एमएसपी क्या है

MSP का full form है Minimum Support Prices जो की एक न्यूनतम मूल्य गारंटी है जो किसानों के लिए सुरक्षा या बीमा के रूप में कार्य करता है जब वे विशेष फसल बेचते हैं। ये फसलें सरकारी एजेंसियों द्वारा किसानों को एक निर्धारित मूल्य पर खरीदी जाती हैं और किसी भी स्थिति में एमएसपी में बदलाव नहीं किया जा सकता है। इसलिए, MSP का कानून देश में किसानों को उन स्थितियों में बचाती है, जहां फसल की कीमतों में भारी गिरावट आती है। गेहूं और चावल उन शीर्ष फसलों में से हैं जो देश के किसानों से MSP पर सरकार द्वारा खरीदी जाती हैं। MSP के तहत कुल 22-23 फसलें खरीदी जाती हैं।

किन फसलों की एमएसपी निर्धारित होती है

प्रतिवर्ष रबी और खरीफ की फसलों का एमएसपी निर्धारित किया जाता है। इसकी गणना प्रतिवर्ष सीजन की फसल आने से पूर्व निर्धारित की जाती है। वर्तमान समय में कुल 23 फसलों के लिए सरकार द्वारा एमएसपी तय की जाती है। इनमें सात प्रकार के अनाज हैं पांच प्रकार के दलहन हैं सात प्रकार के तिलहन है और चार प्रकार के कमर्शियल फसलें हैं। सरकार धान, गेहूं, जौ, बाजरा, मक्का, तुवर, चना, उड़द, मूंग, सोयाबीन, सरसों, मसूर, जूट, कपास, गन्ना, सूरजमुखी इत्यादि फसलों के दाम निर्धारित करती है।

MSP कौन सेट करता है

एमएसपी केंद्र सरकार द्वारा चुनिंदा फसलों के लिए निर्धारित किया जाता है, जो कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) से प्राप्त सिफारिशों के आधार पर किया जाता है। CACP को MSP का निर्धारण करने का काम सौंपा जाता है, जो कुछ हद तक स्वामीनाथन समिति से प्राप्त एक सूत्र पर आधारित है, जो किसानों द्वारा सामना किए गए मुद्दों को हल करने के लिए सरकार द्वारा गठित पैनल था।

किसानों से खरीद किस प्रकार होती है

फसलों का न्यूनतम मूल्य हर साल फसलों की बुवाई से पहले ही तय कर दिया जाता है। एमएसपी हर खरीफ और रबी सीजन के लिए पहले से तय होती हैं। ऐसे भी बहुत सारे किसान हैं जो एमएसपी देख कर ही कौन सी फसल की बुआई करनी है इसका चुनाव करते हैं। सरकार बहुत सारी एजेंसियों के माध्यम से किसानों से एमएसपी पर अनाज खरीद लेती है इसके बाद से किसानों का अनाज खरीद के सरकार उसे बफर स्टॉक बना देती है।

एक बार जब अनाज की सरकारी खरीद हो जाती है उसके बाद यह अनाज एफसीआई और नए सेठ के पास जमा हो जाता है। बाद में इस अनाज का इस्तेमाल सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए किया जाता है। अगर किसी कारणवश बाजार में किसी अनाज में तेजी आती है यानी कि उसका मूल्य उसके वास्तविक मूल्य से कई गुना बढ़ जाता है तब सरकार अपने बफर स्टॉक में से अनाज को खुले बाजार में निकालती है और इस प्रकार उस अनाज की बढ़ी हुई कीमतों पर कंट्रोल करती है।

एमएसपी सिस्टम में आ रही दिक्कतें क्या है

आमतौर पर किसानों कि जो फसलें हैं उनकी सही लागत तय कर पाना दिक्कत का काम है। अक्सर जो छोटे किसान हैं वह अपनी फसल को एमएसपी पर नहीं भेज पाते हैं। इस बात का फायदा बिचौलिया उठाते हैं और किसानों से कम मूल्य पर उनकी फसलों को खरीदकर उसे खुदरा बाजार में अच्छे दामों पर बेचकर अच्छा खासा मुनाफा कमाते हैं।

दूसरी चुनौती यह है कि कई सारी फसलें हैं जो एमएसपी के दायरे से बाहर आती हैं। सरकार को इन सभी फसलों को एमएसपी के दायरे में लाना चाहिए इससे किसानों को सुरक्षित करने में और उनके जीवन के स्तर को बेहतर बनाने में निश्चित रूप से काफी सहायता मिलेगी।

केरल राज्य में सब्जियों का भी एमएसपी निर्धारित होता है

जी हां केरल एक ऐसा राज्य है जहां पर सब्जियों का भी एमएसपी निर्धारित होता है। केरल भारत का पहला ऐसा राज्य है जिसमें 16 प्रकार की सब्जियों को एमएसपी के दायरे में रखा गया है। सब्जियों का निम्नतम मूल्य सब्जियों की पैदावार की लागत से 20% ज्यादा होगा। हरियाणा सरकार ने भी केरल की तरह ही सब्जियों को एमएसपी के दायरे में लाने की पहल शुरू की है। इसके लिए मीडिया द्वारा सर्वे कराया जा रहा है और एजेंसियों की मदद ली जा रही है ताकि सब्जियों की सही एमएसपी निर्धारित करने में आसानी हो

MSP CHART ( Minimum Support Prices )

आप भारत सरकार की वेबसाइट पर जाके MSP यानि Minimum Support Prices देख सकते हैं।

MSP अस्तित्व में कैसे आया

सरकार द्वारा MSP- आधारित खरीद द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजों द्वारा शुरू की गई राशन प्रणाली से शुरू हुई । खाद्य विभाग की शुरुवात 1942 में हुई । आजादी के बाद, इसे खाद्य मंत्रालय में परिवर्तित किया गया था। ये वो समय था जब देश को भोजन की भारी कमी का सामना करना पड़ा था। 1960 के दशक में जब हरित क्रांति की शुरुआत हुई, तो भारत सक्रिय रूप से अपने खाद्य भंडार को कम करने और कमी को रोकने के लिए सक्रिय था।

एमएसपी प्रणाली अंततः 1966-67 में गेहूं के लिए शुरू हुई और अन्य आवश्यक खाद्य फसलों को शामिल करने के लिए इसका विस्तार किया गया। इसके बाद सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीबों को रियायती दरों पर बेच दिया गया।

एमएसपी और कानून

यह कुछ हद तक अजीब है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य की अवधारणा – किसानों की आय बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण पहलू है – किसी भी कानून में कोई उल्लेख नहीं है, भले ही वह दशकों से हो। जबकि सरकार साल में दो बार MSP की घोषणा करती है, लेकिन MSP को अनिवार्य बनाने वाला कोई कानून नहीं है। तकनीकी रूप से इसका मतलब यह है कि सरकार किसानों से एमएसपी खरीदती है, लेकिन ऐसा करने के लिए कानून द्वारा बाध्य नहीं है।

तथ्य की बात के रूप में, कोई कानून नहीं है जो कहता है कि एमएसपी निजी व्यापारियों पर भी लगाया जा सकता है। सीएसीपी ने पहले किसानों के लिए एक ठोस एमएसपी कानून बनाने के लिए कानून बनाने की सिफारिश की थी, लेकिन इसे केंद्र ने स्वीकार नहीं किया।

कृषि बिलों की व्याख्या

किसान व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक, 2020 का निर्माण करते हैं, जो किसानों को एपीएमसी मंडियों के बाहर अपनी उपज बेचने की अनुमति देता है, यहां तक ​​कि अंतिम ग्राहक भी उच्च कीमत प्रदान करता है। दूसरा एक – मूल्य आश्वासन और फार्म सेवा विधेयक, 2020 पर किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौता – किसानों को पूर्व-अनुमोदित कीमतों पर फसलों की खरीद के लिए एक अनुबंध कृषि समझौते में खरीदार को प्रवेश करने की अनुमति देता है। तीसरा विधेयक आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक है जो सामान्य परिस्थितियों में आवश्यक वस्तुओं के रूप में प्याज, अनाज, दाल, आलू, खाद्य तिलहन और तेलों जैसी वस्तुओं को अवर्गीकृत करता है।

Conclusion

एमएसपी का सबसे मुख्य फायदा यह है कि किसी भी फसल को किसानों से एमएसपी से कम कीमत पर नहीं खरीद सकते हैं। इससे किसानों के पास दो विकल्प होते हैं अगर बाजार में उन्हें उनकी फसल का मूल्य एमएसपी से ज्यादा मिल जाता है तो उस उस वह उस फसल को बाजार में भी मिल सकते हैं वरना एमएसपी का विकल्प तो उनके पास है ही।

इससे किसानों की कड़ी मेहनत और उसके बाद भी फसलों की सही कीमत नाम मिलने की चुनौती दूर होती है और किसानों का परिश्रम सार्थक होता है। हम उम्मीद करते हैं कि आने वाले समय में सरकारें इस कानून को और बेहतर बनाने का प्रयास करेंगी ताकि किसानों को जो फायदे मिल रहे हैं वो और बेहतर तरीके से मिले और हमारे किसान भाई जो अथक परिश्रम करके धरती मां की सेवा करते हैं हमारे लिए अनाज उगाते हैं उनका जीवन बेहतर बने।

तो दोस्तों अब आप समझ चुके होंगे की MSP kya hai और इससे किसानो को क्या फायदे हैं। इसी प्रकार के और लेख पढ़ने के लिए अजनभा को subscribe करें।

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