माँ को मनाना है कोरोना को भगाना है – इस प्रकार मनाएं 2020 का चैत्र नवरात्र

आखिर वो शुभ घडी आ ही गयी जिसका हम सब को इंतज़ार था, आ गया नवरात्री का पहला दिन। आज के दिन माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है जो धन धान्य और सुख समृद्धि प्रदान करने वाली हैं।

आम तौर पर हम सब को हर साल माँ के आने का इंतज़ार रहता ही है पर इस बार कोरोना के वजह से भक्तों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है लेकिन माँ के भक्तों को बस हृदय से माँ की पूजा करनी चाहिए भले ही उनके पास सामग्री हो या न हो।

25 मार्च को कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:05 बजे से 07:01 बजे तक है। इस साल भजन के कार्यकर्मों और सत्संगों पर पाबन्दी है पर माँ को आप अपनी भक्ति से अवश्य प्रसन्न कर सकते हैं। माँ शैलपुत्री के जन्म के बारे में एक कथा विख्यात है, एक बार दक्ष प्रजापति ने एक महायज्ञ आयोजित किया जिसमे उन्होंने सभी देवी देवताओं को निमंत्रित किया किन्तु भगवन शिव को निमंत्रण नहीं भेजा क्यूंकि वो अपने दामाद भगवान शिव को नापसंद करते थे। शिव द्वारा मना करने के उपरांत भी माता सती यज्ञ में गयी किन्तु वह भगवान् शिव का अपमान होता देख वो क्रोधित हो गयी और उन्होंने यज्ञ को नष्ट कर दिया और खुद भी यज्ञ वेदी में देह त्याग कर दिया। इसके बाद अगले जनम में सती का जनम शैलराज हिमालय के घर हुआ जहा उनका नाम शैलपुत्री padaa.

नवरात्री के पहले दिन कलश स्थापना करके माँ शैलपुत्री की विधिवत पूजा की जाती है और माँ का निम्नलिखित मंत्र का जाप किया जाता है। मंत्र इस प्रकार है।

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्रये नमः

हमने आपकी सुविधा के लिए इस मंत्र का एक वीडियो भी दिया हुआ है ताकि आप सुनने के साथ साथ जाप भी कर सकें। आप अपनी सुविधा के अनुसार 108 या 1008 बार इस मंत्र का जाप कर सकते हैं। माँ शैलपुत्री की सवारी बैल है और उनके एक हाथ में त्रिशूल तथा दूसरे हाथ में कमल का फूल है साथ ही माथे पर चन्द्रमा सुशोभित हैं। माँ का ये स्वरुप अत्यंत ही सुहावना और महा कल्याणकारी है।

माँ के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा कलश स्थापित करके की जाती है तत्पश्चात माँ को पुष्प, अक्षत, धुप, सिन्दूर इत्यादि अर्पित करें और माता के मंत्र का उच्चारण करें और फिर गाय के घी का दिया जलाके धुप बाती से माँ की आरती उतारें और घंटी तथा शंखनाद करें। इसके बाद माँ को भोग लगाया हुआ प्रसाद ग्रहण करें तथा माँ से संपूर्ण विश्व की शांति के लिए प्रार्थना karein.

इस प्रकार विधिवत माँ शैलपुत्री की पूजा अर्चना करने से माँ प्रसन्न होती हैं और धन धान्य से घर भर देती हैं। अगले लेख में हम आपको बताएँगे माँ ब्रह्मचारिणी के बारे में और उनकी पूजा विधि के बारे में।

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