Navratri Kyu Manaya Jata Hai दुर्गा पूजा क्यों मनाया जाता है

Navratri Kyu Manaya Jata Hai दुर्गा पूजा क्यों मनाया जाता है

इस लेख में आप जानेंगे की Navratri Kyu Manaya Jata hai और इसके पीछे कौन सी कथा है।

दोस्तों हम सभी ये जानते है कि नवरात्रि एक ऐसा त्यौहार (उत्सव ) है जो एक वर्ष दो बार मनाया जाता है. एक नवरात्री गर्मी की शुरुआत पर चैत माह में आती है और दूसरी शीत के शुरुआत में आश्विन माह में आती है, यह कहा जाता है की प्रकृति में बदलाव के कारण हमारे तन मन और मष्तिस्क में भी बदलाव आते है, इसलिए लिए शारीरिक और मानसिक संतुलन बनाये रखने के लिए हम उपवास रखकर शक्ति की पूजा करते है , पवित्र शक्तियो के आराधना करने के लिए यह सबसे उत्तम माना जाता है।

Navratri Kyu Manaya Jata Hai

नवरात्री की पहली कथा

नवरात्री क्यों मनाई जाती है तथा नवरात्री दुर्गा आराधना क्यों की जाती है इसे लेकर दो कथाये प्रचलित है। इसमें हम प्रथम कथा का वर्णन करते है , इस कथा के अनुसार लंका युद्ध में ब्रह्मा जी ने श्री राम से रावण वद्ध के लिए चंडी देवी का पूजन कर देवी को प्रसन्न करने के लिए कहा , और विधि के अनुसार चंडी पूजन के लिए और हवं के लिए दुर्लभ १०८ नीलकमल की व्यवस्था भी कर दी. वही दूसरी और रावण ने भी अमरत्वा प्राप्त के लिए चंडी पाठ करना सुरु कर दिया।

ये बात पवन देव के माध्यम से इंद्रदेव ने श्री राम तक पहुचायी , इधर रावण ने मायावी तरीके से पूजा स्थल पर हवं सामग्री में से एक नीलकमल गायब कर दिया जिससे श्री राम की पूजा बाधित हो जाए।

श्री राम जी का संकल्प टूटता नज़र आ रहा था तभी श्री राम जी को याद आया की उन्हें कमल नयन नवकंज लोचन भी कहा जाता है तो उन्होंने अपने नेत्र को पूजा में समर्पित करने की सोची। श्री राम जी ने जैसे ही अपने नेत्र को निकलना चाहा तभी माँ चंडी जी प्रकट हो गयी और उन्होंने ये कहा की वो पूजा से बहुत प्रसन्न हुई है और उन्होंने श्री राम जी को विजय श्री का आशीर्वाद दिया , दूसरे तरफ रावण के पूजा के समय हनुमान जी एक ब्राह्मण बालक का रूप धारण करके वहा पहुंच गए और वह पूजा कर रहे ब्राह्मणो की सेवा करने लगे।

ब्राह्मणो ने उस बालक की निःस्वार्थ भाव की सेवा से प्रसन्न होकर कुछ मांगने को कहा , तब हनुमान जी अर्थात वह बालक ब्राह्मणो से एक – “ज्या देवी भूतहरणी ” स्थान पर करणी उच्चारित करने को कहा , हरणी का अर्थ होता है पीड़ा दूर करने वाली और करणी का अर्थ होता है पीड़ा देने वाली. इससे माँ दुर्गा नाराज़ हो गयी और रावण को शाप दिया कि रावण का सर्वनाश हो जायेगा। तो दोस्तों ये थी हमारी नवरात्री की प्रथम कथा और अब आप समझ गए होंगे की Navratri Kyu Manaya Jata Hai अब सुनते हैं दूसरी कथा।

नवरात्री की दूसरी कथा Navratri Kyu Manaya Jata Hai

नवरात्रि को एक बार सत्य और धर्म के जीत के रूप में मनाया जाता है तो वही दूसरी बार इसे भगवान श्री राम के जन्मोत्स्व के रूप मनाया जाता है। शक्ति स्वरूपा देवी दुर्गा ने समस्त लोगो के कल्याण के लिए तथा दुष्ट दानवो और राक्षसों का विनाश करने के लिए कई बार अपने अलग अलग रूप धारण किये , इसी कारण संसार में देवी दुर्गा के कई रूपों की पूजा की जाती है , विशेषकर नवरात्री में ९ दिन तक देवी दुर्गा के ९ स्वरूपों की पूजा की जाती है।

Navratri 9 Devi Names

  1. नवरात्री के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है इनकी आराधना करने से प्राकृतिक आपदाये , रोग और संक्रमण से रक्षा होती है।
  2. दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है माँ के इस रूप की आराधना करने से भक्तो की कुंडली जागृत होती है, इस दिन माँ को भोग के लिए शक़्कर चढ़ाई जाती है।
  3. तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है इनका वाहन बाघ है , योग साधना में सफलता पाने के लिए माँ के इस रूप की पूजा की जाती है ,इस दिन माँ को दूध का भोग लगाना चाहिए।
  4. चौथे दिन माँ कुष्मांडा की पूजा की जाती है इनकी पूजा करने से यश की प्राप्ति होती है और व्यक्ति सहनिर्णय शक्तिमान बनता है, इस दिन माँ को मालपुवे का भोग लगाना चाहिए।
  5. नवरात्री के पांचवे दिन माँ स्कंदमाता की पूजा की जाती है इनकी पूजा करने से भक्तो को मानसिक शांति मिलती है इस दिन माँ को केले का भोग लगाना चाहिए।
  6. नवरात्री के छठे दिन माँ कात्यायनी देवी की पूजा की जाती है , इस देवी की पूजा करने से कुवारी लड़की का शीघ्र विवाह और समाज में प्रभाव बढ़ता है , इस को शहद का भोग लगाना चाहिए।
  7. नवरात्री का सातवा दिन माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है इनकी उपासना से आकस्मित आने वाली संकट एवं परेशानियों से माँ रक्षा करती है, इस दिन माता जी को गुड़ का भोग लगाना चाहिए।
  8. नवरात्री के आठवे दिन माँ महागौरी की पूजा की जाती , सभी विवाहित स्त्रियाँ अपने पति के लम्बी आयु के लिए माँ के इस रूप की पुजा करती है , इस दिन महागौरी माता जी को नारियल का भोग लगाना चाहिए।
  9. नवरात्री के नौवे दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है, माँ के इस रूप की पूजा करने से भक्तो की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है, इस दिन माँ को तिल का भोग लगाया जाता है।
Shailputri Mantra

Navdurga Mantra

  • पहला दिन ( शैलपुत्री मंत्र ) : ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम:
  • दूसरा दिन ( ब्रह्मचारिणी मंत्र ) : ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:
  • तीसरा दिन ( चंद्रघंटा मंत्र ) : ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चन्द्रघंटायै नम:
  • चौथा दिन ( कुष्मांडा मंत्र ) : ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्मांडायै नम:
  • पांचवा दिन ( स्कंदमाता मंत्र ) : ॐ ऐं ह्रीं क्लीं स्कंदमातायै नम:
  • छठा दिन ( कात्यायनी मंत्र ) : ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कात्यायनायै नम:
  • सातवां दिन ( कालरात्रि मंत्र ) : ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नम:
  • आठवां दिन ( महागौरी मंत्र ) : ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महागौर्ये नम:
  • नौवां दिन ( सिद्धिदात्री मंत्र ) : ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्यै नम:

तो दोस्तों हमें उम्मीद है की अब आप ये समझ गए होंगे की Navratri Kyu Manaya Jata Hai और किस प्रकार आप Navdurga Mantra jaap से माँ दुर्गा को प्रसन्न कर सकते हैं। नयी जानकारियों के लिए हमारा newsletter subscribe ज़रूर करें। आपने इस लेख को अंत तक पढ़ा इस लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद्।

सम्बंधित लेख : जानिए साई कष्ट निवारण मंत्र Sai Kasht Nivaran Mantra के बारे में जिसे सुनने से सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *